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दहेज के प्रति जागरूकता



दहेज हमारी समझ की अनावश्यक परम्परा बन चुकी है जिससे हजारों लाखों घर बरबाद हो रहे है नित्या प्रतिदिन हजारों महिला इसका शिकार  बन रही है जिससे घरेलू हिंसा को बढ़ावा मिल रहा है

दहेज के कानून
हमारी न्याय प्रणाली में इसके लिए अलग कानून बनाया गया है जो C.R.P.C. धारा 498A में बताया गया है । तथा जिसको संशोधित भी किया जाता रहा है । और मजबूत व्यवस्था बनाए रखने के लिए।
धारा 498A - जब किसी महिला का पति या रिश्तेदार उस महिला के साथ किसी भी प्रकार की क्रूरता करता है तो वह इस धारा के अन्तर्गत दंडनीय है।

सजा का प्रावधान
C.R.P.C की धारा 498A के अन्तर्गत दोषी को तीन साल की सजा हो सकती है तथा दहेज का मूल्य व शादी में को भी उपहार दिए जो वापस नहीं किए जा सकते उनका मूल्य भी समलित होता है।

जाने उपहार व दहेज में अंतर
जो लड़की शादी के समय अपने ससुराल वालों या उनके रिश्तेदारों के लिए अपनी मर्ज़ी से उपहार लाती है उसे विधि के अन्तर्गत उपहार माना गया है परन्तु जब महिला से या उसके परिवार वालों से किसी भी समान या पैसो की मांग होती है तो वह दहेज के अन्तर्गत समलित किया गया है 

498A के अन्तर्गत क्रूरता क्या है 
 जब किसी महिलाएं को उसके पति या उसके रिश्तेदारों के द्वारा किसी भी बात को मनवाने के लिए शारीरिक या मानसिक दबाव डाला जाता है या ताने दिए जाते है या किसी भी प्रकार के बल का प्रयोग हो वह क्रूरता के अन्तर्गत आता है 
दहेज लेना या देना दोनों अपराध की श्रेणी में आता है

Dowry prohibition act 1961. की धारा 3 के अनुसार दोनों बातें अपराध की श्रेणी में समलीत की गई है ऐसा होने पर तीन साल से ज्यादा पाच साल की सजा तथा 10,000 का जुर्माना निर्धारित किया गया है।
महिला थाना में साल 2018 में दर्ज मामले:  177
दहेज प्रताड़ना: 139
छेड़छाड़: 07
मारपीट: 08
पीटा : 01
अन्य : 07




Aritcle Author: Shikha Gurah Nirwal

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